कमली 2 हो रही तैयार, जानें-क्या दिखेगा इस बार?

‘कमली’ को उत्तराखंड की सबसे कामयाब फिल्मों में गिना जाता है। यही वजह है कि लोग लंबे समय से इसके दूसरे पार्ट की मांग कर रहे थे। आखिरकार हिमालयन फिल्म्स ने इसकी औपचारिक घोषणा कर दी है।

हिमालयन फिल्म्स ने यूट्यूब पर एक कम्युनिटी पोस्ट डालकर फिल्म को लेकर कुछ जानकारी दी है। यहां हम आपको न सिर्फ वो जानकारी देंगे बल्कि बताएंगे अंदर की कुछ बातें। जैसे इस बार फिल्म की स्टोरी क्या होगी? और कौन-से वो कलाकार हैं जो शायद आपको कमली पार्ट 2 में नजर नहीं आएंगे।

कमली पार्ट 2 का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हमारे चैनल पर भी हमने दो वीडियोज इस फिल्म को लेकर बनाए और कमेंट्स में अधिकतर लोगों ने कमली पार्ट टू के बारे में ही पूछा है। तो अच्छी खबर ये है कि कमली पार्ट 2 जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

हिमालयन फिल्म्स ने एक कम्युनिटी पोस्ट डालकर बताया कि कमली फिल्म की शूटिंग शुरू है। पोस्ट में देरी का कारण भी बताया गया। पोस्ट के मुताबिक कमली की 10वीं, 12वीं और मेडिकल की पढ़ाई को दिखाने की वजह से शूटिंग में काफी टाइम लग गया। खैर आप उम्मीद कर सकते हैं कि अगले साल मार्च या अप्रैल से पहले ये फिल्म सिनेमाघरों में हो सकती है। क्योंकि फिल्म की शूटिंग काफी वक्त से चल रही है।

इस बार क्या है स्टोरी?
पहले पार्ट में आपने देखा कि कमली डॉक्टर बनने का सपना पाले आगे बढ़ रही है। पार्ट 2 में आपको कमली का ये सपना पूरा होता दिखेगा। फिल्म का प्लॉट इसी के आसपास घूमता है। पार्ट 2 में आप कमली की 10वीं, 12वीं और मेडिकल पढ़ाई देखेंगे। और इस पढ़ाई को करने के लिए उसे किन आर्थिक और सामाजिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, वो इस फिल्म का अहम हिस्सा होगा।

कौन-कौन कलाकार दिखेंगे?
पार्ट 2 में आपको कमली की भूमिका में प्राची पंवार नजर आएंगी। जिन्होंने पहले भाग में भी कमली का किरदार निभाया था। प्राची के साथ ही सवाली मैडम भी आपको नजर आएंगी। सवाली मैडम का किरदार इस बार भी तुलिका चौहान ही निभाती नजर आएंगी। फिल्म का निर्देशन अनुज जोशी और गीत प्राची पंवार के पिता जितेंद्र पंवार के ही लिखे होंगे।

अब बात करते हैं उन दो कलाकारों की जो शायद आपको इस बार फिल्म में नजर नहीं आएंगे। हम बात कर रहे हैं जीतू और शिब्बू की। जीतू यानि अभिषेक जग्गी अभी पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, शिब्बू यानि सचिन पंवार थाइलैंड में होटल में नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में पूरी संभावना है कि पार्ट 2 में आपको जीतू और शिब्बू की जोड़ी नजर नहीं आए।

हालांकि संभावना ये भी है कि जीतू और शिब्बू का रोल इसबार कोई और कलाकार निभाएं। क्योंकि फिल्म निर्माता नहीं चाहेंगे कि इतने फेमस कैरेक्टर्स को खत्म किया जाए।

तो दोस्तों ये थी कुछ जानकारी और कयास। फिलहाल हम फिल्म का इंतजार करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जैसे पार्ट वन ने सबके दिल में जगह बनाई, वैसे ही पार्ट 2 भी सबसे दिल में जगह बनाए।

IPL 2020: फील्ड पर पहाड़ का ‘नौना’, स्टू़डियो में पहाड़ की नौनी का धमाल

रुद्रप्रयाग की गलियों से निकलकर, बॉलीवुड का सफर करते हुए, एक चेहरा IPL 2020 तक पहुंच गया है। नाम है तान्या पुरोहित। IPL 2020 का आगाज हो चुका है। हमेशा की तरह इस बार भी IPL में उत्तराखंड के कई खिलाड़ी अपना जलवा बिखेर रहे हैं। इसमें धोनी, रिषभ पंत और पवन नेगी जैसे प्लेयर शामिल हैं।

ये तो हो गई ऑन फील्ड की बात लेकिन अब जरा ऑफ फील्ड भी नजर दौड़ाइए। हर मैच के दिन स्टार स्पोर्ट्स पर आइए क्योंकि यहां पर मैच की अपडेट्स और इंटरव्यूज लेकर आपको नजर आती हैं तान्या पुरोहित।

तान्या पुरोहित IPL 2020 में स्टार स्पोर्ट्स की एंकर हैं और कोरोना काल में मुंबई से आपतक IPL की अपेडट्स पहुंचाने में जुटी हुई हैं। लेकिन तान्या का परिचय सिर्फ इतना भर नहीं है।

 

कौन हैं तान्या पुरोहित?
तान्या का नाता उत्तराखंड के उस परिवार से है, जिसने यहां की विरासत को संभालने में अहम भूमिका निभाई है। तान्या रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक के क्वीली गांव की हैं। वर्तमान में वह अपने पति के साथ मुंबई में रहती हैं।

तान्या के पिता डॉ. डीआर पुरोहित गढ़वाल विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। हालांकि उनकी पहचान सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। दाता राम  पुरोहित ने उत्तराखंड की संस्कृति और रंगमंच को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है। डी आर पुरोहित ही वो शख्स हैं, जिन्होंने जोशीमठ की उर्गम घाटी के मुखौटा नृत्य ‘रम्माण’ को यूनेस्को की नजर में लाया है।

तान्या के पति दीपक डोभाल भी एक न्यूज एंकर हैं। श्रीनगर से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले दीपक राज्यसभा टीवी में बतौर एंकर दिख चुके हैं। फिलहाल वह ज़ी बिज़नेस में एंकर के तौर पर शामिल हैं। तान्या की तरह ही दीपक भी रंगमंच से जुड़े रहे हैं।

बॉलीवुड में तान्या
तान्या वैसे तो बचपन से ही थियेटर करती आ रही हैं लेकिन बॉलीवुड में उनकी मजबूत शुरुआत NH-10 फिल्म से हुई है। फिल्म में तान्या ने अहम भूमिका निभाई है। इस फिल्म में उन्हें एक और उत्तराखंडी अभिनेत्री अनुष्का के साथ काम करने का मौका मिला। NH-10 के अलावा तान्या ने टेरर स्ट्राइक और कमांडो जैसी फिल्मों में काम किया है। सिर्फ यही नही, तान्या ने फ्लिपकार्ट और विजय सेल्स के लिए एडवरटाइजिंग में भी काम किया है।

एंकरिंग से तान्या का पुराना नाता
तान्या  कैरेबियन प्रीमियर लीग में भी एंकरिंग कर चुकी हैं। इसके अलावा द ड्रामा कंपनी यूट्यूब चैनल के लिए भी कुछ वीडियोज उन्होंने किए हैं। यानि कि तान्या रंगमंच से लेकर एंकरिंग के स्टेज तक, हर जगह छाई हुई हैं।

हम उम्मीद करते हैं कि आगे भी तान्या ऐसे ही तरक्की करती रहें और उत्तराखंड का नाम रोशन होता रहे। क्योंकि जब भी उत्तराखंडी चमकता है तो उत्तराखंड बढ़ता है।

उत्तराखंड पर बनी 6 फ़िल्में, जिन्होंने देश और दुनिया में तारीफ कमाई

आपने बॉलीवुड फिल्म केदारनाथ देखी होगी। कांछी, मीटर चालू बत्ती गुल, स्टूडेंट ऑफ द इयर टू, ट्यूबलाइट समेत कई बॉलीवुड फ़िल्में हैं, जो उत्तराखंड में बनी हैं या फिर इसके परिवेश की कहानी को लेकर चलती हैं। कमर्शियल सिनेमा की इन फ़िल्मों की चमक के बीच वो फ़िल्में हमें कम ही पता चलती हैं जो पहाड़ को उसके असली स्वरूप में दुनिया के सामने पेश करते हैं।  हम आपको 6 ऐसी ही फ़िल्मों के बारे में बता रहे हैं, जिनमें आपको पहाड़ बिना किसी फ़िल्टर के दिखता है। शायद इसीलिए इसमें वो फ़िल्में भी शामिल हैं जिन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता और ऑस्कर तक नॉमिनेशन हासिल किया है।

दाएं या बाएं

दाएं या बाएं

 दाएं या बाएं
दाएं या बाएं फिल्म में बॉलीवुड एक्टर दीपक डोबरियाल, मानव कौल समेत कई बॉलीवुड एक्टर्स ने अपनी एक्टिंग का जादू बिखेरा।
कहानी रमेश मजीला  यानि दीपक डोबरियाल के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में एक जिंगल लिखने पर रमेश को कार इनाम में मिलती है। इसी के आसपास पूरी कहानी घूमती है। इस फिल्म में आपको न सिर्फ शुद्ध पहाड़ी परिवेश नज़र आता है बल्कि इस फ़िल्म का निर्देशन भी उत्तराखंड की बेला नेगी ने किया है। फ़िल्म में आपको पहाड़ के कवि गिरीश तिवारी गिरदा भी नज़र आते हैं।

यह फ़िल्म 2010 में रिलीज़ हुई थी। एक शुद्ध पहाड़ी फ़िल्म को अगर बॉलीवुड के कैमरे से देखना है तो ‘दाएं या बाएं’ एक बेहतरीन विकल्प है।

हंसाहंसा
हंसा वो फिल्म है जो महज 17 दिन में बनकर तैयार हुई। इसे सिर्फ 5 लाख रुपये के बजट में बनाया गया। इस फिल्म का निर्देशन करने वाले मानव कौल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ये फिल्म हमने सिर्फ़ डीवीडी पर देखने के लिए बनाई थी। लेकिन बाद में फ़िल्म को आसियान फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड मिला। PVR की तरफ से इसे बाकायदा सिनेमाघरों में रिलीज किया गया।  क्रिटिक्स ने इस फ़िल्म को खूब सराहा।

हंसा पहाड़ के उस बच्चे की कहानी है, जिसके पिता सालों से शहर से नहीं लौटे हैं। हंसा और उसकी दीदी अपने पिता को खोजने की कोशिश करती हैं। बीमार मां और लापता पिता को सँभालने की कहानी है हंसा। इस फ़िल्म के ज़रिये आप पहाड़ में अकेला और कठिन जीवन जीने वाले बच्चों का दर्द समझ सकते हैं। 


कुमाउंनी फिल्म- आस

कुमाउंनी फिल्म- आस

आस
आस उत्तराखंड की पहली रीजनल लैंग्वेज फ़िल्म है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। कुमाऊँनी भाषा में बनी फ़िल्म आस, बलि प्रथा पर चोट करती है। फ़िल्म में कुछ बच्चे बली चढ़ाने के लिए लाई गई बकरी की जान बचाने के लिए जतन करते हैं। 

इस फ़िल्म को दिल्ली इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में ऑडियंस च्वॉइस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा प्रतिरोध का सिनेमा, कोलकाता चिल्ड्रन इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में भी इसका सेलेक्शन हुआ। वहीं, उत्तराखंड के स्तर पर बात करें तो फ़िल्म ने यहां भी बेस्ट डायरेक्टर, सिनेमैटोग्राफर और बेस्ट फ़िल्म का ख़िताब जीता।  

इस फ़िल्म में आपको पहाड़ के बच्चों की मासूमियत और कुरीतियों पर चोट करती उनकी कोशिश नज़र आती है। 


काफल

काफल


काफल

उत्तराखंड के फेमस फल काफल के नाम पर बनी ये बाल फ़िल्म राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है। फ़िल्म बचपन की उस कहानी से जुड़ती है, जिसमें हर मां-बाप बच्चों को ये कहकर डराते हैं कि सो जा वरना काली माई आ जाएगी।

फ़िल्म में ऐसा ही एक किरदार है- पगली माई का। जिससे बच्चे डरते हैं। पगली माई का किरदार बॉलीवुड एक्ट्रेस और हल्द्वानी से वास्ता रखने वाली सुनिता रजवार ने निभाया है। फ़िल्म की कहानी पगली माई का डर ख़त्म करने और नफ़रत को प्यार में बदलने की बात करती है।

देवभूमि: द लैंड ऑफ गॉड्स

देवभूमि: द लैंड ऑफ गॉड्स

देवभूमि लैंड ऑफ गॉड्स
ये फिल्म कई मायनों में खास है। ये पहली ऐसी इंटरनेशनल फिल्म है जो शत-प्रतिशत उत्तराखंड पर बनी हुई है। इस फिल्म को ख्याति प्राप्त और सर्बिया मूल के डायरेक्टर गोरान पास्कलजेविक ने बनाया है। इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में काफी सराहा गया और पुरस्कारों से नवाज़ा गया। 

फिल्म विदेश से सालों बाद गांव लौटे राहुल यानि विक्टर बनर्जी के बारे में है,  जो जीवन के आखिरी पड़ाव में गांव लौटा है। इस फिल्म को आप अमेजन प्राइम पर देख सकते हैं। यूट्यूब पर भी उपलब्ध है।

 

मोती बाग

मोती बाग

मोतीबाग
अब बात करते हैं उस फ़िल्म की जिसने न सिर्फ़ उत्तराखंड का बल्कि देश का नाम भी रोशन किया है। मोतीबाग। उत्तराखंड के किसान पर बनी डॉक्युमेंट्री मोतीबाग को भारत की तरफ से ऑस्कर में भेजा गया। मोतीबाग पौड़ी गढ़वाल के 83 साल के किसान की कहानी है। जिसने 32 साल पहले सरकारी नौकरी छोड़कर अपने गांव बसने का फैसला किया।

वो भी ऐसे वक्त में जब सब शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। विद्यादत्त शर्मा ने खंडहर होते मकानों और बंजर होते खेतों के बीच एक मोती बाग बनाया है, जिसे वह हमेशा हराभरा रखते हैं। इस डॉक्युमेंट्री में विद्यादत्त के संघर्ष और सफलता की कहानी है। 

ये हैं कुछ उम्दा फ़िल्में जिनमें आपको उत्तराखंड बिना किसी फ़िल्टर के नज़र आता है। साफ-सुतरा पहाड़ीपन।

वीडियो देखें

सोनू निगम की ये बात हर प्रवासी मान जाए तो बदल जाएगी उत्तराखंड की सूरत!

कोरोना की महामारी ने पूरी दुनिया को जैसे रोक सा दिया है। अपने घरदेश छोड़ कर परदेश आए प्रवासी अब अपने घरों को लौट रहे हैं। इस मामले में उत्तराखंड भी अछूता नहीं है। घर लौटे इन प्रवासियों के लिए बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम ने एक बहुत ही अहम संदेश भेजा है। 

सोनू निगम ने एक वीडियो जारी कर उत्तराखंड को लेकर बात की है। उन्होंने इस वीडियो में उत्तराखंड की सबसे गंभीर समस्या पलायन पर शोक जताया। लेकिन इससे भी ज़रूरी वो बात है जो उन्होंने घर लौटे प्रवासियों के लिए कही है। 

सोनू निगम ने अपने इस वीडियो संदेश में कहा है कि कई प्रवासी अपने घऱदेश वापस लौट चुके हैं। कई और लौट भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने पलायन की मार झेली है। ऐसे में अब जो लोग वापस आए हैं, उन्हें स्वरोज़गार शुरू करने पर फ़ोकस करना चाहिए।

सोनू निगम ने सुझाव दिया कि प्रवासी स्वरोज़गार करें। अपने गाँव और अपने परिवार के पास रहें। स्वरोज़गार कर अपने उत्तराखंड का विकास करें

सोनू ने पहाड़ों में काम करने वाली संस्था हंस फ़ाउंडेशन का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि हंस फ़ाउंडेशन और संजय दरमोड़ा जी लगातार यहाँ काम कर रहे हैं। और ये लोग आपके लिए खड़े हैं। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूँ कि आप इनकी मदद पा सकें। सोनू ने सबकी खुशामदी की दुवाएं कर वीडियो ख़त्म किया। 

उत्तराखंड से सोनू का गहरा नाता
ऐसा पहली बार नहीं है जब सोनू निगम का उत्तराखंड के प्रति प्रेम उमड़ा हो। बता दें कि सोनू निगम का उत्तराखंड से गहरा कनेक्शन है। उनकी माँ का मायका रुद्रप्रयाग में धारी देवी के नज़दीक स्थित ठामक गाँव है। सोनू ने कई गढ़वाली फ़िल्मों में भी अपनी आवाज़ दी है। 

सिर्फ़ यही नहीं, नंदा गीतांजली एल्बम में उन्होंने माँ नंदा को समर्पित एक गीत भी गाया था। सोनू ने एक बार कहा था कि जितना प्यार वह अपनी माँ से करते हैं, उतना ही प्यार उन्हें उत्तराखंड से है। सोनू निगम को अपने ननिहाल के अलावा ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा आरती देखना काफी पसंद है। 

सुनिए सोनू का वीडियो मैसेज

 

 

बॉलीवुड गाने का आ रहा पहाड़ी वर्जन, रैपर बादशाह मचाएंगे धमाल

आजतक आपने बॉलीवुड फ़िल्मों में पहाड़ी गाने बजे हैं, ये सुना होगा और देखा भी होगा। बेडु पाको बारामासा, कैले बाज़ी मुरुली और ताछुमा-ताछुमा समेत कई ऐसे गीत हैं जो बॉलीवुड फ़िल्मों में या फिर एलबमों में इस्तेमाल किए गए हैं। लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है जब बॉलीवुड किसी फ़ेमस हिंदी गाने का पहाड़ी वर्जन लेकर आ रहा है। और इस पहाड़ी वर्जन में आपको दिखेंगे रैपर बादशाह और उत्तराखंड के भी कुछ कलाकार। कौन-सा है ये गाना? क्या ख़ास होगा इस गाने में? और कब आप सुन पाएँगे इसे? सब जानकारी मिलेगी आपको आगे. 

रैपर बादशाह का नाम तो आपने सुना ही होगा। अगर आप बादशाह को सुनना पसंद करते हैं तो आपने उनका गाना ‘गेंदा फूल’ भी सुना होगा। कुछ दिन पहले ही आए इस गाने का पहाड़ी वर्जन बनकर तैयार है। इस पहाड़ी वर्जन को सोनी म्यूज़िक लॉन्च कर रहा है। गेंदा फूल के पहाड़ी वर्जन में उत्तराखंड की प्रियंका मेहर और उनके ही साथी रैपर रोंगपा यानि मयंक रावत भी शामिल होंगे। 

इस बार आपको गेंदा फूल में गढ़वाली भाषा के लिरिक्स सुनाई देंगे। गाने के बोल तो जो ओरिजनल गाने के हैं, वही रहेंगे। म्यूज़िक भी ओरिजनल है। लेकिन भाषा गढ़वाली होगी। सिर्फ़ यही नहीं, गाने में आपको बादशाह का रैप भी सुनाई देगा।

कब आएगा गाना?
गाने की शूटिंग पूरी हो चुकी है। शूटिंग भी देहरादून में ही हुई है। 13 जुलाई 2020 यानि कल ये गाना रिलीज़ होगा। ऑरिजिनल गाने में आपने जैकलीन फ़र्नांडीज़ का डांस देखा लेकिन इस गाने में आपको बादशाह के साथ प्रियंका और मयंक रावत नज़र आएंगे। 

पहले भी पहाड़ी गाने में रैप कर चुके हैं बादशाह
ये पहली बार नहीं है जब बादशाह किसी पहाड़ी गाने में रैप करेंगे। इससे पहले उन्होंने जुबिन नौटियाल का पहाड़ी गाने में साथ दिया था। जुबिन ने कोक स्टूडियो में जौनसारी गीत- ‘ओ साथी-ओ साथी’ गाया था तो उसमें भी बादशाह ने रैप किया था।

सिर्फ़ यही नहीं, बादशाह को पहाड़ी गानों से बहुत लगाव है। उत्तराखंड के ही RJ राज जोन्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने पहले ही जानकारी दे दी थी कि वह एक पहाड़ी गाने में काम करने वाले हैं। 

बॉलीवुड के ऐसे ही लोगों की वजह से हमारी उत्तराखंड की पहचान बनेगी। शायद ऐसे ही लोगों की बदौलत हमारा उत्तराखंडी सिनेमा भी दूसरे सिनेमाओं की तरह बेहतर कर पाएगा। बॉलीवुड में जमे हमारे उत्तराखंडी कलाकारों को भी शायद एक रास्ता दिखाएगा कि जब बादशाह कर सकते हैं तो आप लोग क्याों नहीं? 

अशोक मल्ल: वो एक्टर जो पहले किसान फिर सबकुछ था

1987 में जब पहली कुमाऊँनी फ़िल्म मेघा आ रिलीज़ हुई तो एक डायलॉग सबकी जुबां पर था। ‘गंगुवा की खुकुरी दुधारी भै, दुधारी’। जिन्होंने इस डायलॉग को फ़िल्म के विलन के मुँह से सुना, उन्हें आज भी ये डायलॉग याद है। इसे अमर करने वाले थे- अभिनेता अशोक मल्ल।

अशोक मल्ल एक अभिनेता से पहले किसान थे और वो ख़ुद ये ज़ाहिर किया करते थे। वो अपनी जड़ों की खोज में भी जुटे थे लेकिन उससे पहले  वो  हो गया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।

अशोक मल्ल का निधन
8 जुलाई, 2020। सुबह के 5 बजकर 57 मिनट हो रहे थे। नवी मुंबई के साई स्नेहदीप हॉस्पिटल में उत्तराखंड का एक और चमकता सितारा बुझ गया। उत्तराखंड की दर्जनों फ़िल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरने वाले अशोक मल्ल हमेशा के लिए चले गए।अशोक लंबे समय से बीमार थे। वह कैंसर की बीमारी सी पीड़ित थे।

पहले किसान फिर एक्टर थे अशोक
अशोक मल्ल ने मेघा आ, चक्रचाल, मेरी गंगा होली त् मैमु आली, कौथिग, बंटवारु समेत कई फ़िल्मों में अभिनय किया। अशोक जी ने गोपी भिना फ़िल्म का निर्देशन भी किया था। एक अभिनेता होने से पहले अशोक प्रकृति प्रेमी थे। मुंबई के कोलाबा में उनका अपना बोटैनिकल गार्डन है। सिर्फ़ यही नहीं अशोक को ख़ुद को किसान कहने में फक्र महसूस होता था। यही वजह है कि सोशल मीडिया में अपने परिचय में सबसे पहले वह किसान लिखते थे और फिर बाक़ी चीजें। 

अपनी जड़ों की खोज में जुटे थे अशोक दा
अशोक दा वैसे तो पिथौरागढ़ के मूल निवासी थे। वह धपड़पट्टा, पुलिस लाइन के रहने वाले थे। पिथौरागढ़ के मिशन इंटर कॉलेज से 1978 में उन्होंने ग्रैजुएशन पूरा किया। लंबे समय से वह अपने परिवार के साथ मुंबई में ही रहते थे।

वो अपनी जड़ों की खोज में जुटे थे। पिछले साल से वो अपने वंशजों के मूल ठिकाने का पता लगाने में जुटे हुए थे। अपनी इस खोज में उन्हें पता चला कि वे नेपाल से उत्तराखंड आए थे। उनकी बड़बूबू ब्रिटिश आर्मी में थे। उनके बुबु का जन्म अल्मोड़ा के वार कैंप में हुआ था। उसके बाद उनकी परवरिश देवलथल के मल जमतड़ निवासी उनके रिश्तेदारों ने की थी। अशोक जमतड़ जाने की तैयारी में थे लेकिन तभी बीमारी ने उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया और वो अपनी जड़ तक पहुँचने से पहले ही चले गए। 

रहते मुंबई में थे, दिल उत्तराखंड में था
अशोक दा वैसे तो मुंबई में रहते थे लेकिन उनका दिल हमेशा उत्तराखंड में बसता था। गोपी बिना के प्रीमियर पर सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने उत्तराखंड को याद किया था। इस दौरान उन्होंने लोगों से अपनी बोली-भाषा याद रखने को कहा। उन्होंने कहा कि आप दुनिया के जिस भी कोने में रहें। जहां भी रहें। जो भी करें। आप चाहें दुनिया की कोई भी भाषा सीख लें लेकिन अपनी मातृ भाषा कभी न भूलें। क्योंकि वही हमारा मूल है।

उत्तराखंडी फ़िल्मों का इतिहास ज़्यादा पुराना नहीं है। लेकिन जितना भी है, उसमें अशोक मल्ल जी की बहुत ही अहम भूमिका है। आज उत्तराखंडी फ़िल्मों की कल्पना उनके अभिनय के बिना करना संभव नहीं।

उम्मीद करते हैं कि भविष्य में हमारा सिनेमा भी भोजपुरी और दूसरे क्षेत्रीय सिनेमा की तरह आगे बढ़ेगा। अशोक मल्ल जैसे अभिनेताओं का योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

टीवी के ‘श्रीकृष्ण’ उत्तराखंड में एक महान काम करने में जुटे हैं!

आपका जन्म 90 के दशक में हुआ है तो आप रामायण के राम, महाभारत और श्रीकृष्ण सीरियल के ‘श्री कृष्ण’ से जरूर वाकिफ होंगे। वाकिफ क्या… हम और आप वो बच्चें हैं जिनके लिए टीवी पर आने वाले श्रीकृष्ण ही असल भगवान थे। दूरदर्शन एक बार फिर ‘श्रीकृष्ण’ सीरियल टेलीकास्ट करने वाला है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीकृष्ण का किरदार निभाने वाले वो कलाकार कौन हैं और आजकल कहां हैं? इस वीडियो में हम आपको न सिर्फ उस कलाकार के बारे में बता रहे हैं बल्कि आज जो काम वो कर रहे हैं, वो उन्हें भगवान के बराबर ही खड़ा कर देता है।

कृष्ण के अवतार में सर्वदमन

कृष्ण के अवतार में सर्वदमन

सर्वदमन डी बनर्जी बने थे श्रीकृष्ण
श्री कृष्ण सीरियल में श्री कृष्ण का किरदार सर्वदमन डी बनर्जी ने निभाया था। सर्वदमन की वो मुलमुल मुस्कान और उनका वो बोलने का अंदाज आज भी हम लोगों को याद है। सर्वदमन जिन्हें हम भगवान मान चुके थे वो आज भी भगवान तुल्य काम कर रहे हैं।

माता के साथ सर्वदमन

माता के साथ सर्वदमन

20 साल से ऋषिकेश है निवास
सर्वदमन डी बनर्जी का जन्म वैसे तो उत्तर प्रदेश के उन्नाव में हुआ। हालांकि वो मूलत: बंगाल के रहने वाले हैं। लेकिन अब वो उत्तराखंड के ऋषिकेश में रहते हैं। पिछले करीब 20 सालों से यही उनका बसेरा है। बॉलीवुड की चकाचौंद से दूर सर्वदमन ऋषिकेश में मेडिटेशन सेंटर चलाते हैं। लोगों को योग सिखाते हैं।

सिर्फ यही नहीं, मेडिटेशन के अलावा सर्वदमन बनर्जी ‘पंख’ नाम के एक NGO से भी जुड़े हैं। वो इस एनजीओ के जरिये उत्तराखंड में झुग्गियों में रहने वाले गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देते हैं। पहाड़ की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनकर आजीविका कमाने में भी मदद करते हैं। 

बॉलीवुड से क्यों गायब हुए ‘श्रीकृष्ण’
अब आप सोचेंगे कि श्रीकृष्ण और कुछ अन्य सीरियलों में दिखने के बाद सर्वदमन क्यों गायब हो गए। आखिर क्यों उन्होंने बॉलीवुड फिल्में कीं? तो इस सवाल का जवाब खुद सर्वदमन देते हैं। एक इंटरव्यू में सर्वदमन ने बताया क’मैंने ‘कृष्णा’ करते वक्त ही फैसला कर लिया था कि मैं 45-47 साल की उम्र तक ही काम करूंगा। उन्होंने कहा था कि एक वक्त तक ये चकाचौंध आपको बहुत अच्छी लगती है, लेकिन उसके बाद आपको आत्मीय शांति की जरूरत होती है।

कृष्ण अवतार

कृष्ण अवतार

 

सर्वदमन को वो आत्मीय शांति ऋषिकेश में मिली। लंबे समय तक बॉलीवुड से दूर रहने के बाद सर्वदमन धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी में कोच बने नजर आए। लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि उन्होंने ऋषिकेश या फिर वो अच्छा काम करना छोड़ दिया हो… वो आज भी इसमें लगे हुए हैं। सर्वदमन बनर्जी

हमने सर्वदमन जी को सिर्फ श्रीकृष्ण में ही नहीं, बल्कि ‘अर्जुन’, ‘जय गंगा मैया’ और ‘ओम नम: शिवाय  जैसे सीरियलों में भी देखा लेकिन इन सबमें भी वो या तो श्रीकृष्ण ही बने या फिर विष्णु के किरदार में नजर आए। उन्होंने बड़े परदे स्वामी विवेकानंद और आदि शंकराचार्य जैसी फिल्में भी कीं।

सर्वदमन ने भले ही टीवी के रुपहले परदे पर श्रीकृष्ण का किरदार निभाया हो लेकिन आज जो काम वो कर रहे हैं। उस काम ने उन्हें कई लोगों के लिए भगवान ही बना दिया है। हम कामना करते हैं कि हमारे बचपन के हीरो श्रीकृष्ण उर्फ सर्वदमन बनर्जी यूं ही अच्छा काम करते रहें। और जरूरतमंदों की मदद में लगे रहें।

 

वीडियो देखें


कमली फिल्म के बाल कलाकारों को अब पहचानना मुश्किल!

कमली फिल्म उत्तराखंड की सबसे ज्यादा चलने वाली फिल्मों में से एक है। बाल कलाकारों से भरी यह फिल्म 2011 में आई थी। तब से न सिर्फ वक्त बदला है, बल्कि बदल गए हैं इस फिल्म के कलाकार भी। पहले के एक लेख में हम आपको बता चुके हैं कमली यानि प्राची पंवार के बारे में। इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं- कमली फिल्म के अन्य कलाकारों के बारे में।

सवाली मैडम
कमली फिल्म के कुछ किरदार काफी फेमस हुए। उनमें से ही एक थी सवाली मैडम। कमली फिल्म में सवाली मैडम बनी थीं, सुहानी यानि तुलिका चौहान। साढ़े तीन साल की उम्र में तुलिका ने सवाली मैडम की भूमिका निभाई थी। अब वह बड़ी हो गई हैं। और देहरादून के प्रेम नगर में रहती हैं। यहां वह कक्षा आठवीं की छात्रा हैं। तुलिका के पिता एक टीचर होने के साथ ही कमली फिल्म के निर्देशक अनुज जोशी के मित्र भी हैं।

सवाली मैडम यानि तुलिका चौहान

सवाली मैडम यानि तुलिका चौहान

जीतू
सवाली मैडम के साथ ही कमली फिल्म से जीतू और शिब्बु की जोड़ी भी काफी फेमस हुई थी। इस जोड़ी में जीतू का रोल किया था अभिषेक जग्गी ने। अभिषेक जग्गी कोई प्रोफेशनल एक्टर नहीं हैं और ना ही वो अब एक्टिंग से जुड़े हुए हैं। अभिषेक चमियाला के करीब पड़ने वाले सिल्यारा गांव के रहने वाले हैं। जब अभिषेक को जीतू का रोल मिला था तो वे कक्षा 8वीं पढ़ते थे। और अब वह देहरादून में M.Sc कर रहे हैं।

जीतू यानि अभिषेक पंवार

जीतू यानि अभिषेक पंवार

शिब्बु
अब बात करते हैं शिब्बु की। शिब्बु बने थे सचिन पंवार। अभिषेक और सचिन भी एक ही स्कूल में पढ़ते थे और एक ही क्लास में। सचिन पंवार ने भी अपनी एक्टिंग का जादू बिखेरा था लेकिन आज वो एक्टिंग से दूर हॉटेल इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं। फिलहाल वह थाइलैंड में होटल में काम करते हैं।

शिब्बु यानि सचिन पंवार

शिब्बु यानि सचिन पंवार

जीतू और शिब्बु के बारे में बता दें कि इन दोनों ने एक्टिंग की कोई ट्रेनिंग नहीं ली। इन दोनों को एक ऑडिशन के दौरान चुना गया था। फिर चार दिन इन्होंने फिल्म की शूटिंग में बिताए। बता दें कि कमली फिल्म की शूटिंग चमियाला और उसके करीब के गांवों में ही हुई थी।

कमली की मां
फिल्म में कमली की मां बनी हैं, उत्तराखंड की खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक- रीता ध्यानी। रीता ध्यानी काफी समय से उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव हैं और कई एलबमों में वह नृत्य कर चुकी हैं।

कमली की मां यानि रीता ध्यानी

कमली की मां यानि रीता ध्यानी

मास्टर जी
अब आखिर में बात करते हैं एक और अहम किरदार की। मास्टर जी। फिल्म में मास्टर जी बने थे डॉ. अनिल नौटियाल. अनिल जी असल जिंदगी में भी एक टीचर हैं। चमियाला में उन्होंने करीब 8 से 10 साल टीचर के तौर पर सेवा दी है। फिलहाल वह उत्तरकाशी में अपने परिवार के साथ रहते हैं। नौटियाल जी की पत्नी एक स्कूल चलाती हैं। साथ ही अनिल जी अभी भी बच्चों को शिक्षित करने में जुटे हुए हैं।मास्टर जी यानि डॉ. अनिल नौटियाल

कमली-2 का इंतजार होगा खत्म!
अब बात करते हैं कमली- पार्ट 2 की। आप में से कई लोगों ने पूछा कि आखिर कमली का दूसरा भाग कब आ रहा है। तो इसका जवाब है कि कमली भाग-2 इसी साल आपके बीच हो सकता है। फिल्म की आधे से ज्यादा शूटिंग पूरी हो चुकी है।

हमारी ‘पुष्पा छोरी’ अब हमारे बीच नहीं रही

पुष्पा छोरी पौड़ी खाला की… और पाणी भर लेणा कोरटीन वे जैसे गानों में अपना जलवा बिखेरने वाली अभिनेत्री रीना रावत अब हमारे बीच नहीं रही हैं।

जानकारों की मानें तो रीना रावत को 12 मार्च को हार्ट अटैक आया… इसकी वजह से उनका निधन हो गया। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि वह काफी दिनों से बीमार चल रही थीं। लेकिन उनका निधन हृदय गति रुकने से ही हुआ, बताया जा रहा है।

रीना रावत वही अभिनेत्री हैं, जिनका पुष्पा छोरी पौड़ी खालै की गाने में डांस ने उन्हें घर-घर पहुंचाया था। रीना ने न सिर्फ उत्तराखंडी एलबमों में काम किया, बल्कि उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय भी किया है। रीना ने भगयान बेटी,मायाजाल, घन्ना भाई चालबाज, फ्योंली जवान हवेगे जैसी फिल्मों में काम किया है।

फेसबुक पर उत्तराखंड फिल्म जगत से जुड़े कई लोग रीना को याद करते हुए पोस्ट लिख रहे हैं। एक पोस्ट के मुताबिक रीना का अंतिम संस्कार 13 मार्च को सुबह 9 बजे नजफगढ़ में किया जाएगा।

हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि रीना की आत्मा को शांति प्रदान करे। हमारा उत्तराखंड सिनेमा भले ही अपने पैरों पर अभी तक खड़ा ना हो पाया हो, लेकिन आज जितना भी उत्तराखंड सिनेमा नजर आता है तो रीना रावत जैसे कलाकारों की वजह से है। जिन्होंने उस दौर में समाज की सोच के विपरीत जाकर पहाड़ी एलबमों में अभिनय की शुरुआत की थी और उत्तराखंडी सिनेमा को जिंदा रखने का काम किया था।

हम ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। उत्तराखंडी सिनेमा उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा।

Maati Pehchaan: उत्तराखंड की पहली फिल्म जो दे रही बॉलीवुड को टक्कर

उत्तराखंड ने भले ही बॉलीवुड को दीपक डोबरियाल, उर्वशी रोतेला, प्रसून जोशी समेत कई कलाकार दिए हों। लेकिन उत्तराखंड का अपना सिनेमा कभी खड़ा नहीं हो पाया है। इसकी एक वजह जहां सरकार की निराशहीन फिल्म नीति है तो वहीं अभी तक बनी फिल्मों की दोयम दर्जे की क्वालिटी। लेकिन अब शायद ये बदल जाएगा। 

पहली बॉलीवुड स्टाइल फिल्म
उत्तराखंड में पहली बार बॉलीवुड को टक्कर देने वाली फिल्म बनी है। फॉर्च्यून टॉकीज मोशन पिक्चर्स के बैनर तले उत्तराखंड की पहली बॉलीवुड स्टाइल फिल्म बनी है। नाम है -माटी पहचान।

रिलीज हो चुके हैं 2 टीजर
माटी पहचान फिल्म की टक्कर सिर्फ क्वालिटी के आधार पर नहीं, बल्कि कहानी और अभिनय को लेकर भी है। माटी पहचान के दो टीजर रिलीज हो चुके हैं। जब आप इन टीजर को देखते हैं तो महसूस होता है कि आप कोई बॉलीवुड फिल्म का ही टीजर देख रहे हैं। फिल्म में डायलॉग, एक्टिंग और परिवेश पूरा उत्तराखंड का है लेकिन क्वालिटी और सिनेमैटोग्राफी पूरी बॉलीवुड के टक्कर की। 


 

सच्ची घटनाओं से प्रेरित है फिल्म
माटी पहचान की कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित है। फिल्म के टीजर देखने पर पता लगता है कि इस फिल्म में ना सिर्फ पलायन पर चोट की गई है। बल्कि बेटियों के हक की भी बात है। सिर्फ कहानी ही नहीं, बल्कि फिल्म मनोरंजन से भी भरपूर है। फिल्म  में पहाडों के रोजमर्रा के मुद्दों को शामिल किया गया है।

वैसे तो उत्तराखंड में अब तक कई फिल्में बनी हैं। लेकिन इसके बावजूद उत्तराखंड का अपना सिनेमा नहीं है। और अब तक जितनी भी फिल्में बनी हैं, उनके निर्माता या उनमें पैसे लगाने वाले अधिकतर उत्तराखंड के ही थे। लेकिन माटी पहचान की बात अलग है। 

गैर-उत्तराखंडी की एक कोशिश
माटी पहचान के निर्माता फराज़ शेर हैं। फराज उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। फराज चाहते तो भोजपुरी फिल्म बनाकर अच्छे पैसे कमा सकते थे। लेकिन उन्होंने हमारे क्षेत्र को चुना। फराज़ ने हमारे कलाकारों को एक मंच दिया है। लेकिन अब देखना यही होगा कि इस फिल्म को उत्तराखंड की सरकार कितना बढ़ावा देती है। क्योंकि उत्तराखंडी फिल्मों को चलाने के लिए यहां के लोगों की रुचि के साथ-साथ यहां की सरकार का भी साथ चाहिए।

अजय बेर हैं फिल्म के डायरेक्टर
माटी पहचान फिल्म का निर्देशन उत्तराखंड के जाने-माने डायरेक्टर अजय बेर ने किया है। फिल्म की कहानी मन मोहन चौधरी ने लिखी है। फिल्म में गाने लिखने के साथ ही संगीत उराखंड के मशहूर संगीतकार राजन बजेल ने दिया है। फिल्म को शूट करने का जिम्मा दिल्ली के डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी (DOP) फारुक खान के पास था।

आ गया पहला गीत
माटी पहचान के दो टीजर रिलीज हो चुके हैं। हाल ही में फिल्म का होली पर एक धमाकेदार गाना रिलीज हुआ है। आप इस फिल्म के टीजर और गाने फॉर्च्यून टॉकीज म्यूजिक के यूट्यूब चैनल पर जाकर देख सकते हैं।

एक अपील
एक उत्तराखंडी होने के नाते इस फिल्म को बढ़ावा जरूर दें। इस फिल्म को एक ऐसे शख्स ने बनाई है जो उत्तराखंड से नहीं। ऐसे में उस शख्स का विश्वास मजबूत करने के लिए और बेहतरीन क्वालिटी की फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए इस फिल्म के टीजर को शेयर जरूर करें। अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बताएं। और जब आपके शहर या कस्बे में फिल्म लगे तो जरूर देखने जाएं।

क्योंकि तभी हमारा सिनेमा बनेगा, जब अच्छी फिल्में बनेंगी और हम उन्हें देखने जाएंगे।