शेयर बाज़ार में करना है निवेश तो रुपीसीड करेगा आपकी मदद

अगर आप शेयर बाज़ार में निवेश करना चाहते हैं। शेयर बाज़ार में निवेश में मदद चाहते हैं तो ये ख़बर आपके लिए है। ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग प्लैटफ़ॉर्म रूपीसीड ने एक ऐसी ही पहल की है। रूपीसीड अपने प्लेटफ़ॉर्म पर न सिर्फ़ निवेशकों को निवेश करने का मौक़ा दे रहा है, बल्कि ब्रोकर्स के लिए भी यह काफ़ी मुफ़ीद है।

रुपीसीड अपने प्लेटफ़ॉर्म पर आपको स्टॉक मार्केट की हर आयाम से रूबरू कराते हैं। एनालिटिक्स, डाटा, कॉरपोरेट न्यूज़। ये सारी चीजें आपको एक जगह पर ही मिलती हैं। इन सबकी मदद से आप न सिर्फ़ निवेश को लेकर ज़्यादा बेहतर फ़ैसला ले पाते हैं बल्कि शेयर बाज़ार को और बेहतर तरीक़े से भी समझते हैं।

अगर बात ब्रोकर्स के लिहाज़ से करें तो उनके लिए ये काफ़ी बेहतरीन जगह है। यहाँ उन्हें फ़्रंट ऑफिस के साथ मिड ऑफिस प्रोडक्सट्स भी मिलते हैं। ई-केवाईसी प्लेटफ़ॉर्म, ट्रेडिंग टर्मिनल्स, वेब और मोबाइल ट्रेडिंग ऐप, रिस्क मैनेजमेंट समेत कई चीजें मिल जाती हैं।

सिर्फ़ यही नहीं, प्लेटफ़ॉर्म पर आपको 100 से ज़्यादा टूल्स और स्टडीज़ मिलती हैं, जिनके बूते आप आसानी से ऑनलाइन ट्रेडिंग कर सकते हैं। चार्ट, ऑर्डर्स और चार्ट की पॉजीशन भी आप यहाँ पर देख सकते हैं।

प्लेटफ़ॉर्म पर आपको हिस्ट्रॉरिकल और इंट्राडे डाटा भी मिल जाता है। यूज़र्स को स्ट्रैटेजी का पूरा एनालिसिस भी यहाँ मिलता है। ट्रेडिंग न्यूज़ समेत बहुत कुछ आपको यहाँ पर मिलता है।

2012 में शुरू हुई रूपीसीड कंपनी काफ़ी प्रतिष्ठित ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म है। रिलायंस सिक्योरिटीज़, आनंद ऐंठी, जेएच फ़ाइनेंशियल समेत कई दिग्गज ब्रोकर्स इनके प्रोडक्ट्स यूज करते हैं। 

कोरोना वायरस से कैसे लड़ें? जानें- वायरस से ठीक हुए शख्स से

कोरोना को मैंने कैसे हराया? सभी लोग जानना चाहते हैं। इसलिए दवाई, उपचार, डर, भय सबपर थोड़े से विस्तार से लिख रहा हूं…. पढ़िए और शेयर कीजिये।

पूरी दुनिया में कोरोना ने जो तबाही मचाई है उसे देखकर सुनकर भारत में भी हर शख्स डरा हुआ है। सावधानी बरत रहा है लेकिन फिर भी सहमा हुआ है। उसे यही डर रहता है कि पता नहीं कब कहां से ये वायरस उड़कर आ जाएगा और गले पड़ जाएगा। उसका डर वाजिब भी है क्योंकि ये खांसने और छींकने से ही फैलता है।

किसी ने अपने हाथ पर खांस लिया है या छींक लिया है और आप उसके हाथ द्वारा छुए हुए सामान के सम्पर्क में आ गए तो ये वायरस आपके गले पड़ जाएगा। सीधे आपके मुंह पर खांस दिया है तब तो ये वायरस आपको छोड़ेगा ही नहीं। आपके शरीर में घुस जाएगा, बिन बुलाए मेहमान की तरह।

बाकी सरकारी अस्पताल, प्राइवेट अस्पताल की स्थिति की बारे में आप टीवी पर देख सुन रहे ही हैं। लगातार बढ़ते संक्रमण और मौत के आंकड़े देख भी डर ही रहे होंगे। बेड नहीं हैं। वेंटिलेटर नहीं हैं। बहुत कुछ नहीं है। ये सब सुनकर डर ही लगता है।

इसलिए इस वायरस को अपने अंदर से खत्म करने की कहानी इसके डर को खत्म करने से ही शुरू होती है। अब ह्यूमन नेचर है। डर के आगे कितनी भी जीत हो डरेगा तो है ही। मैं भी डर गया था। बुरी तरह डर गया था। अपने परिवार और ढाई साल के बेटे की तरफ देखकर घबरा गया था।

लेकिन दोस्तों ने साथियों ने और ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के मेरे सीनियर्स ने और मेरे बॉस सन्त सर ने हिम्मत दी, हौसला बढ़ाया, कि बस डरना नहीं है। कोरोना की यही रीत है, डर के आगे जीत है। संस्थान ने खूब साथ दिया। सेहत को लेकर हर रोज अपडेट संस्थान द्वारा लिया गया। हर परेशानी में संस्थान साथ खड़ा है ये अहसास दिलाया। सभी का शुक्रिया।

दरअसल 21 मई को मैं ऑफिस में था। घर से ठीक ठाक गया था। लेकिन ऑफिस में अचानक से मेरे सिर में दर्द शुरू हुआ। मैं काम करता रहा, सिर का दर्द 1-2 घंटे बाद पूरे शरीर के दर्द में बदल गया। पूरे शरीर में दर्द शुरू हो गया। मैंने अपने दोस्त प्रदीप ठाकुर को ये बात बताई की मेरे पूरे शरीर में दर्द हो रहा है।

उसने तत्काल प्रभाव से मुझे दर्द की कोई टेबलेट मंगाकर दी। दवाई खाई तो कुछ मिनट के लिए आराम लग गया। इधर मेरी शिफ्ट भी खत्म हो गई। दर्द के साथ ही घर आ गया। लेकिन मैंने ऑफिस से ही घर फोन कर दिया था कि आज मेरी तबियत ठीक नहीं है, इसलिए सबलोग थोड़ा दूर ही रहना।

खैर, घर आया और पैरासिटामोल की एक टेबलेट लेकर सो गया। रात भर दर्द रहा। सुबह 4 बजे तक बुखार हो गया। बुखार भी 102। अपने दोस्त को फोन किया, वो सुबह 5-6 बजे ‘डोलो’ टेबलेट देकर गया। मुझे कुछ अंदेशा लगने लगा था इसलिए दोस्त को बोल दिया था की टेबलेट बाहर ही रखकर चला जाए। पास ना आए।

‘डोलो’ ली तो कुछ देर में बुखार उतर गया। लेकिन अगले दो दिन यही रूटीन रहा। बुखार आता, मैं दवाई लेता और वो भाग जाता। 24 तारीख तक यही चला। साथ में खांसी भी हो गई। खांसी बलगम वाली। इसलिए जो लोग कहते हैं कि बलगम वाली खांसी कोरोना का लक्षण नहीं है, ये एक मिथ है।

25 मई को ठीक होकर मैं फिर से अपने ऑफिस ‘टीवी9 भारतवर्ष’ पहुंच गया। 2 दिन बुरी तरह थकान रही। लगा बुखार में कई बार प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं इसलिए 2 लीटर फ्रूटी पी गया। 28 मई को एक दो बार जबरदस्त खांसी हुई। 25 मई को भी एकबार जबरदस्त खांसी उठी। जैसे ‘खांसी’ का अटैक हो गया हो। क्योंकि 28 तारीख को बार बार खांसी आ रही थी तो मेरे दोस्तों, वरिष्ठों ने सुझाव दिया कि मुझे अपना कोविड टेस्ट कराना चाहिए।

अगले दिन सभी की बात मानकर मैं दिल्ली में अपोलो अस्पताल पहुंच गया। वहां उन्होंने कोविड के लिए अलग से दो तीन रूम बनाए हुए हैं। वहीं डॉ को सिम्पटम्स बताए, बुखार, खांसी और बाकी हिस्ट्री बताई। 4850 रुपये जमा किये। बिल बना। उन्होंने नाक और गले से सेम्पल लिया और मेरा टेस्ट हो गया। अगले दिन 30 मई को रिपोर्ट ईमेल पर आ गई। डिटेक्टेड। मतलब पॉजिटिव।

रिपोर्ट देखते ही लगा भयंकर वाला डर। भूकंप तो रोज आ ही रहे हैं, वो मेरा स्पेशल भूकंप था। जिसमें सिर्फ मैं हिला था। ऑफिस में बताया। बॉस का फोन आया, एचआर से फोन आया। स्थिति पूछी गयी। और पूछा गया कि हॉस्पिटल में रहना चाहोगे या घर। हमारे रिपोर्टर कुमार कुंदन का फोन आया, उन्होंने बहुत समझाया।

बाकी लोग जो पहले से हॉस्पिटल में थे उनका हाल चाल और हॉस्पिटल में इलाज की स्थिति का पता किया। तो आखिर में मेरे द्वारा ही ये तय किया गया कि घर में ही एक कमरे में बंद रहना है। और इलाज करना है।

कहानी लम्बी हो रही है इसलिए अब सीधे 14 दिन के ट्रीटमेंट पर आता हूं। 30 मई से ही मैंने काढ़ा पीना शुरू किया। नमक, हल्दी गर्म पानी में डालकर गरारे करने शुरू किए। दिन में 4-5 लीटर गर्म पानी पीना शुरू किया। और विटामिन की दवाई लेनी शुरू की। सबसे पहले सुबह उठकर कच्चे आंवला और गिलोय का जूस खाली पेट पीता था।

क्योंकि आंवले में विटामिन सी होता है। 3-4 दिन बाद आंवला पीना बन्द कर दिया क्योंकि वो खट्टा होता है और आयुर्वेद में ये कहा जाता है कि खट्टी चीजें खाने पीने से खांसी ठीक नहीं होती है। इसलिए आवंला बन्द कर गिलोय पीता रहा। इसके बाद काढ़ा पीता था। 3-4 दिन बाद ही दूध भी पीना बन्द कर दिया। क्योंकि बलगम वाली खांसी में दूध परेशान ही करता है। ऐसा सब लोग कहते हैं। क्योंकि मेरी पत्नी को भी वही सिम्पटम्स हो गए थे जो मुझे थे इसलिए उसका ट्रीटमेंट भी बिना टेस्ट कराए ही शुरू कर दिया। इसलिए दो लोगों का काढ़ा बनता था।

-काढ़ा बनाने की विधि-
लोंग 7
इलायची हरी 4
काली मिर्च गोल 7-8
दालचीनी 3-4 टुकड़े
सौंठ 1 चम्मच
मुनक्का 4

इनको 2 गिलास पानी में उबालें, जब एक गिलास पानी बच जाए तो दो व्यक्तियों को आधा-आधा पीना है तीन टाइम, सुबह दोपहर शाम, खाना खाने के बाद, सुबह नाश्ते के बाद। और अगर एक ही व्यक्ति के लिए काढ़ा बनाना है तो एक गिलास पानी में बाकी सामान आधा डाल लें। जब वो पानी पक कर आधा गिलास रह जाए तो उसे छानकर पी लें। ऐसा दिन में कम से कम तीन बार करें।

दिन में कम से कम तीन बार ही गरारे करता था। सुबह, दोपहर और शाम। खाना खाने के थोड़ी देर बाद कर सकते हैं। एक गिलास पानी को गर्म करके उसमें थोड़ा सफेद नमक और आधा चम्मच हल्दी डालकर गरारे करता था। ये बेहद जरूरी है। रोज सुबह गर्म पानी से ही नहाता था और नहाने के बाद 15-20 मिनट छत पर जाकर धूप में बैठता था क्योंकि कोरोना से लड़ने के लिए इम्युनिटी का मजबूत होना जरूरी है।

मैंने तुलसी अर्क मंगाया था। एक गिलास गर्म पानी में दिन में 8-10 बूंदे डालकर पीता था, दिन में सिर्फ एक बार। गर्म पानी में हल्दी डालकर भी पी है। हर बार गर्म ही पानी पिया है।

Zincovit की टेबलेट ली थी। एक दिन में सिर्फ एक गोली, दोपहर में खाने के बाद।

Limcee Vitamin C Chewable ली थी। सुबह शाम एक-एक टेबलेट।

कोरोना का संक्रमण नाक में भी होता है इसलिए सुबह शाम पानी में अजवाइन डालकर भाप लेता था। कुछ ड्राई फ्रूट्स भी खाए हैं। जैसे बादाम और किशमिश। फलों में रोज एक सेब खाया है, गर्म पानी में धोकर और थोड़ा बहुत पपीता। अपने बर्तन खुद साफ किये हैं। कपड़े खुद धोए हैं। हर रोज सेनेटाइजर से कमरे की सफाई करता था। जो कुछ भी लिखा है ये सभी कुछ जरूरी और बेहद जरूरी है।

घर में भी मास्क लगाकर रहना जरूरी है। बार बार साबुन से हाथ धोना जरूरी है। इन सब चीजों की वजह से कोरोना से लड़ाई में जीत मिली है। मुझे ही नहीं मेरे कई साथियों को जीत मिली है।

कुछ लोग इस बात को लेकर आशंकित रहते हैं कि अगर उन्हें कोरोना हो जाए तो तुरंत अस्पताल की तरफ भागना चाहिए या नहीं। देखिए मैं कोई डॉक्टर नहीं हूं, कोई स्पष्ट राय आपको नहीं दे सकता। लेकिन अनुभव के आधार पर कह रहा हूं अगर आपको गम्भीर बीमारियां हैं। किडनी की। फेफड़ों की। सांस की। तो आपको अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए, क्योंकि अगर इस वायरस से आपको सांस की ज्यादा दिक्कत हुई तो अस्पताल के चक्कर और बेड तलाशते हुए ही शायद आपका बहुत कुछ पीछे छूट जाएगा, इसलिए एहतियातन आपका शुरू से अस्पताल में रहना जरूरी है।

मुझे ऐसा लगता है। बाकी अगर आप स्वस्थ हैं। कोई परेशानी नहीं है। पुरानी गम्भीर बीमारी नहीं है तो घर में रहकर इस बीमारी का इलाज संभव है।

इस बीमारी ने मुझे काफी परेशान भी किया। 2-3 दिन जबड़े में दर्द रहा। खाना चबाने में परेशानी होती थी। और सबसे बड़ा दुख ये भी था कि मुझे अपने बेटे KT से 14 दिन तक अलग रहना पड़ा। ये बीमारी किसी को बताने वाली भी नहीं है। लोग दहशत मानते हैं। मेरे अडोस पड़ोस में भी लोगों में दहशत थी। मुझको लेकर कई तरह की अफवाहों को बल दिया गया। खैर, लोगों के अपने डर हैं। जिसने डरना है डरे, हमें तो अपना काम करना है।

अपने स्वास्थ्य और परिवार के बारे में सोचना है। कुछ खास दोस्तों को छोड़ दें तो कोई अड़ोसी पड़ोसी रिश्तेदार आपके बारे में सोचने नहीं आएगा। हां अड़ोसी पड़ोसी डर के मारे पुलिस बुला सकते हैं कि भई हमारे यहां ये कोरोना का मरीज है इसे ले जाओ। ये समाज ही ऐसा है। आप किसी को कितना भी समझाने जाएं, बताएं, लोग नहीं समझते। करते सब अपने मन की ही हैं। इस मुश्किल वक्त में मेरे दोस्त सौरभ त्यागी ने बहुत साथ दिया। हर जरूरत का सामान मुझे घर पहुंचाता रहा। रोज मेरा हौसला मेरे दोस्त प्रदीप ठाकुर ने बढ़ाया। हिम्मत दी।

अब इस पोस्ट की सबसे जरूरी और आखिरी बात, ये एक तरह का डिस्क्लेमर ही है।

मैं कोई आयुर्वेदाचार्य या कोई डॉक्टर नहीं हूं। मुझे भी इस तरह के ट्रीटमेंट की जानकारी अपने दोस्तों और वरिष्ठों से मिली थी। मैंने इसे अपने ऊपर आजमाया था। ये मेरा फैसला था।

अगर आप को इस तरह की कोई परेशानी होती है तो एक बार अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। अपनी हेल्थ स्थिति को मद्देनजर रखकर ही किसी भी चीज का सेवन करें। मैं इस पोस्ट को लिखने से डर रहा था। कहीं किसी का कुछ नुकसान ना हो जाए। इसलिए बिना किसी डॉक्टर की सलाह के कुछ ना करें।

अपनी सेहत के हिसाब से चीजों का इस्तेमाल करें। बाकी महाकाल बाबा सबका भला करेंगे। देश इस वायरस पर जल्द पूरी तरह फतह हासिल करेगा। मास्क लगाकर रखें। दूरी बनाकर रखें। हाथ धोते रहें।

(ये पोस्ट TV9 भारतवर्ष के पत्रकार श्याम त्यागी के वाल से लिया गया है। इस पोस्ट में श्याम जी ने अपना अनुभव साझा किया है)

प्रवासियों के लिए उत्तराखंड सरकार की ये योजना वरदान है?

20 साल जेल की सजा काटने के बाद ये जब उत्तराखंड स्थित अपने गांव वापस लौटा तो उसने आजादी के बदले फिर जेल जाना सही समझा। पुष्कर ने अधिकारियों को पत्र लिखे और चेतावनी दी कि अगर उसे जेल में नहीं डाला गया तो वो आत्महत्या कर लेगा। जानते हैं क्यों उसने ऐसा किया? पलायन की वजह से। 

2016 में आई आपदा ने पुष्कर के गांव में काफी तबाही मचाई थी। तब से यहां के लोग पलायन कर गए। पुष्कर का गांव खाली हो चुका था। एक भी इंसान गांव में नहीं था। घर खंडहर बन चुके थे और गांव पर जंगली जानवरों का कब्जा हो चुका था। इसीलिए पुष्कर जेल जाना चाहता था। उत्तराखंड की पलायन की पीड़ा कोई नई नहीं है। लेकिन शायद कोरोना वायरस का ये बुरा दौर, पलायन रोकने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा और इसके संकेत भी मिलने शुरू हो गए हैं।

लॉकडाउन से पलायन लॉक होने की उम्मीद

लॉकडाउन से पलायन लॉक होने की उम्मीद

प्रवासी भाइयों सुनना जरा
इस बार जब आप अपने घरदेश जा रहे होंगे, तब बस या ट्रेन से सफर के दौरान एक प्लान तैयार कीजिए। प्लान कभी भी परदेश वापस ना आने का। अब आप सोचेंगे कि ये कैसे होगा? आखिर गांव में रहकर हम क्या खाएंगे-क्या कमाएंगे? तो जवाब ये है कि अब आप अपने घर-गांव रहकर खा भी सकते हैं और कमा भी सकते हैं। इसके लिए जरूरत है तो बस एक प्लान की और सरकार इसमें आपकी मदद करेगी।

आप चाहें तो गांव जाकर एक दुकान खोल लें। छोटा सा ढाबा शुरू कर लें। उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा के बूते कोई कारोबार शुरू करना है तो वो करें। आप जो भी करना चाहते हैं. बेहिचक उसकी तैयारी शुरू करें और सरकार इसमें आपका साथ देगी।

स्वरोजगार पहाड़ में

स्वरोजगार पहाड़ में

त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार का नया प्लान
त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की है। इसके तहत आप राज्य में दुकान, डेरी, मछली पालन, व्यूटी पार्लर, पशुपालन, मुर्गी पालन समेत कई काम शुरू कर सकते हैं।

इस योजना के तहत सरकार आपको 35 फीसदी तक सब्सिडी देगी। अगर आप दूरस्थ जिलो में कोई यूनिट लगा रहे है या कारोबार शुरू कर रहे हैं तो आपको 25 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। अगर आपके प्रोजेक्ट की लागत 25 लाख है तो 6 लाख की रियायत सरकार देगी। बी श्रेणी के जिलों में 20 फीसदी और मैदानी क्षेत्रों में प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए 15 फीसदी सब्सिडी मिलेगी।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना

कैसे मिलेगा फायदा?
फायदा उठाने के लिए आपको सिर्फ एक प्लान तैयार करना है। प्लान को लेकर सरकार के पास जाना है। सरकार की तरफ से स्वीकृति मिलते ही बैंक के पास आवेदन जाएगा। बैंक जैसे ही फाइनेंस करने को तैयार होगा, वैसे ही आपको सब्सिडी मिल जाएगी। यानि कारोबार शुरू करने से पहले ही आपको रियायत मिल जाएगी। इस तरह आप बिना तंगी के अपने कारोबार को बढ़ा सकते हैं।

इस योजना की खासियत ही यही है कि आपको शुरुआत में ही मदद मिल जाएगी। आपको सालों तक सब्सिडी मिलने का इंतजार नहीं करना होगा। 

भले ही चीजें थोड़ी मुश्किल हों। आपकी जेब में पैसे ना हों। लेकिन अगर आपको पास एक पुख्ता प्लान है तो आपको जरूर कोशिश करनी चाहिए। ताकि आप अपनी माटी और घर में न सिर्फ रह सको बल्कि उसे बढ़ावा देने में भी योगदान दे सको। 

अब सब जाएंगे घर? मोदी सरकार की गाइडलाइन को समझें

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन दिशा-निर्देशों के बाद राज्य सरकारों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश समेत सभी राज्य इसकी तैयारी कर रहे हैं।

उत्तराखंड सरकार ने एक लिंक जारी किया है। जिसके जरिये बाहर फंसे वर्कर और अन्य लोग रजिस्टर कर सकते हैं। और बाद में उन्हें पता चलेगा कि उनकी एप्लिकेशन मंजूर हुई है या नहीं। प्रवासियों को लाने-ले जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी 4 मई से। 

क्या कहती है केंद्र सरकार की गाइडलाइन?
केंद्र सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइन को अहम बिंदुओं में समझें

  • फंसे हुए लोगों को एक प्रोटोकॉल के तहत ही लाया जाएगा
  • हर राज्य को नोडल अथॉरिटी नियुक्त करनी होगी

  • प्रवासियों को लाने और ले जाने के लिए राज्यों के बीच तालमेल होना जरूरी
  • यात्रा कर रहे सभी लोगों की स्क्रीनिंग होगी। जाने से पहले और पहुंचने के बाद।
  • पहुंचने के बाद आपको कुछ दिन तक होम या इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन में रखा जाएगा। 
  • यानि कि कुछ भी लक्षण न दिखें तो घर पर ही क्वारंटाइन किया जाएगा
  • चिकित्सकों की सलाह पर इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन किया जाएगा यानि अस्पताल या क्वारंटाइन सेंटर में रखा जाएगा।
  • स्क्रीनिंग में अगर कोई भी कोरोना वायरस के लक्षण दिखे तो आपको नहीं जाने दिया जाएगा
  • यानि सिर्फ वही लोग जा सकेंगे जिनमें कोरोना वायरस के लक्षण न दिखें
  • प्रवासियों को बसों से सड़क मार्ग के जरिये ही उनकी मंजिल तक पहुंचाया जाएगा।
  • बसों को पूरी तरह सैनेटाइज करना होगा
  • बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करना होगा
  • आपके मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप हमेशा ऑन रखनी होगी ताकि आपको ट्रेस किया जा सके।

क्या सब जा सकेंगे घर?
जवाब है नहीं। केंद्र सरकार की ये गाइडलाइन सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए है जो दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। इसमें छात्र, प्रवासी मजदूर, यात्री शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि अगर आपकी सरकारी नौकरी है और आप चाहते हैं कि आपका परिवार या फिर आप गांव पहुंच जाएं तो ऐसा नहीं होगा।

पहाड़ के वो मकान जो 1000 साल से सीना ताने खड़े हैं

नदियां एक बार फिर उफान पर हैं। बादल फिर फटने लगे हैं। भारी बारिश से फिर रास्ते बंद हैं। सड़कों पर सैकड़ों लोग फंसे हुए हैं। कई लोग अपने प्राण खो चुके हैं। ये है उत्तराखंड-हिमाचल से आने वाली आजकल की प्रमुख खबरें। प्रकृति का कहर हमेशा की तरह पहाड़ पर उतर रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि यही पहाड़ 1000 साल पहले ही भूकंप से लड़ने का तरीका ढूंढ चुका है?… क्या आपको पता है कि जो सीमेंट के घर आप बना रहे हैं, वही पहाड़ का काल बन रहे हैं? आप भूकंप से बच सकते हैं। बस ‘कोटी बनाल’ को न भूलें।

कोटी बनाल वास्तु कला
आज जो उत्तरकाशी आपदा की सबसे ज्यादा मार झेल रहा है। उसी उत्तरकाशी का एक इलाका है- राजगढ़ी। इस इलाके का भूकंप बाल भी बांका नहीं कर पाया है।… और इसकी वजह है यहां ‘कोटी बनाल’ वास्तुकला शैली से बने मकान। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र यानि DMMC ने इन घरों पर अध्ययन किया है। अध्ययन से पता चला है कि यह निर्माण शैली 1000 साल पुरानी है। इस वास्तुकला में स्थान चयन से लेकर मकान निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया होती है। यह शैली आज की आधुनिक भूकंप रोधी तकनीक से भी कहीं ज्यादा मजबूत है।

कैसे बनाए जाते हैं मकान?
मकान बनाने से पहले एक ऊंचे प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जाता है। घर में निश्चित अंतराल पर लकड़ी के बीम डाले जाते हैं। ये बीम भूकंप आने पर मकानों पर पकड़ बनाए रखते हैं और उसे गिरने नहीं देते। इस शैली में दीवारों पर ज्यादा जोर देते हुए खिडकी दरवाजे कम रखे गए हैं। अमूमन चार—पांच मंजिला इन घरों की ऊंचाई 15 मीटर से लेकर 20 मीटर तक होती है। उत्तराखंड में अब कहा जाता है कि बहुमंजिला इमारतें न बनाई जाएं, क्योंकि इससे भूकंप का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन कार्बन डेटिंग से पता चला है कि हमारे पुरखों ने ये मकान 1000 साल पहले बना दिए थे… और आज भी ये सीना ताने खड़े हैं।

पहाड़ी मकान ही समाधान
ऐसा नहीं है कि सिर्फ कोटी बनाल वास्तुकला से बने घर ही भूकंप रोधी हैं।… विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ के पारंपरिक घर भी काफी हद तक भूकंप रोधी हैं। पहाड़ी मकान स्थानीय कारीगर स्थानयी सामग्री जैसे पठाल, लकड़ी, पत्थर और लाल मिट्टी से बनाते थे।.. छत और पहली मंजिल का पूरा सहारा लकड़ी की कड़ियों और फट्टों/पटेलों पर होता है। मिट्टी और पत्थर की मोटी दीवारें होने से ये न सिर्फ कड़ाके की ठंड से बचाते हैं, बल्कि गर्मियों में भी कुछ हद तक ठंडक बनाए रखते हैं। अनोखे आकार और अनोखी शैली से बने ये घर काफी हद तक भूकंप रहित भी हैं।… लेकिन धीरे-धीरे आधुनिकता की चमक में हम शहरों से घर आयात कर रहे हैं।… और सीमेंट व ईंटों से घर बनाने पर आमादा हैं।

पुरखों की सुनते तो न होती केदारनाथ आपदा
हमारे पुरखों ने पहाड़ की प्रकृति के अनुसार ही यहां रोटी-कपड़ा और मकान का इंतजाम किया था। उत्‍तराखंड के पुराने लोगों ने परंपरागत ज्ञान को लोक गीतों और कथाओं के जरिए आगे बढ़ाया। पुराने समय में एक कहावत कही जाती थी कि नदी किनारे जिसने मकान बनाया, उसका परिवार कभी नहीं पनपा। और हम अपने पुरखों की कही हुई बातें नजरअंदाज़ करते हुए नदी किनारे घर-होटल बनाते रहे… और इसी का परिणाम थी केदारनाथ आपदा।

पारंपरिक घर बनाएं…इनाम पाएं
उत्तराखंड में अगर आप पहाड़ों की पारंपरिक शैली से घर बनाते हैं तो आपको फायदा होगा। राज्य की नई भवन निर्माण नीति के अनुसार अब जो भी व्यक्ति राज्य की पारंपरिक शैली से घर या होटल बनाएगा उसको बाकी आधुनिक भवनों की अपेक्षा एक मंजिल और बनाने की छूट दी जाएगी!… हमें पारंपरिक शैली के घर सिर्फ इसलिए नहीं बनाने चाहिए कि इनाम मिल रहा है, बल्कि भूकंप से खुद को बचाने के लिए और अपनी पौराणिक कला के संरक्षण के लिए बनाने चाहिए।… वरना हर साल खबरें वही होगीं… आज आपके करीबी गांव में हुआ है… कल आपके गांव में होगा… और परसों आपके घर में।

हर उत्तराखंडी को ये एक नंबर हमेशा याद रखना चाहिए

अगर आप उत्तराखंड में रहते हैं या फिर उत्तराखंड के रहने वाले नागरिक हैं, तो आपको एक नंबर अपने दिमाग में नोट कर लेना चाहिए। ये नंबर आपको उत्तराखंड में होने वाली हर दिक्कत से निकलने में मदद करेगा। 

न सिर्फ मदद करेगा बल्कि अगर आप अपने राज्य की योजनाओं के बारे में भी कोई जानकारी चाहते हैं, तो ये नंबर आपके काम आएगा। ये नंबर है- 1905।

किस काम आएगा ये हेल्पलाइन नंबर?
इस हेल्पलाइन नंबर पर आप किसी भी सरकारी विभाग के खिलाफ शिकायत कर पाएंगे। सरकार का दावा है कि इसके जरिये आपकी शिकायत दर्ज हो जाएगी और उसका समाधान किया जाएगा। 

ये हेल्पलाइन राज्य के १३ जिलों में शुरू कर दी गई है। इसके लिए एक कॉल सेंटर भी बनाया गया है। हर दिन सुबह 8 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक इस नंबर पर संपर्क साध सकेंगे। वो भी निशुल्क।

नहीं मिला समाधान तो….?
अगर इस हेल्पलाइन पर कोई समाधान नहीं मिला, तब आप क्या करेंगे तो इसका भी सरकार ने समाधान निकाला है। आपको इस हेल्पलाइन पर कोई समाधान नहीं मिलता है। या फिर कोई आपकी शिकायत नहीं सुनता है तो आप cmhelpline.uk.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

ये शिकायतें नहीं होंगी दर्ज

न्यायालय में विचाराधीन मामले, सूचना का अधिकार अधिनियम से संबंधित मामले, शासकीय कर्मचारियों के उनकी सेवा से संबंधित मामले 1905 हेल्प लाइन में दर्ज नहीं किए जाएंगे। लेकिन सेवा निवृत्त कर्मचारियों के पेंशन, मेडिकल से संबंधित शिकायतों को हेल्पलाइन में दर्ज किए जाएंगे।

उत्तराखंड में पेट्रोल 5 रुपये सस्ता, पर ऐसे मिलेगी और भी ज्यादा छूट

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जारी बढ़ोतरी तो रुकने का नाम नहीं ले रही है, लेक‍िन गुरुवार को एक राहत भरी खबर जरूर आई है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ईंधन की कीमतों में एक्साइज ड्यूटी घटाने का एलान किया है. इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकारों को भी टैक्स में कटौती करने के लिए आह्वान किया है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली की इस घोषणा के बाद उत्तराखंड में भी पेट्रोल और डीजल की कीमत 5 रुपये सस्ती हो गई है. इस तरह अब आपको शुक्रवार से 5 रुपये सस्ती दर पर ईंधन मिलेगा.

लेकिन आप अपनी इस छूट को बढ़ा सकते हैं. इसके लिए आपको सिर्फ भुगतान करने का तरीका बदलना पड़ेगा. दरअसल मोदी सरकार डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने की खातिर प्रोत्साहन दे रही है.

ऐसे में अगर आप पेट्रोल और डीजल भरवाते समय कैशलेस भुगतान करते हैं, तो आपको इन दोनों पर छूट मिलती है. तेल कंपनियों की तरफ से दी जाने वाली यह छूट 0.25 फीसदी की है.

इस छूट का फायदा उठाने के लिए आपको कुछ और नहीं करना है. आपको सिर्फ अपने डेबिट कार्ड, भीम ऐप या अन्य किसी मोबाइल वॉलेट से भुगतान करना है. ये भले ही बड़ी रकम न हो, लेकिन जब आप एक लीटर से ज्यादा पेट्रोल लेंगे, तो इसका फायदा आपको नजर आएगा.

इस तरह आप हर दिन पेट्रोल और डीजल पर होने वाले खर्च को कम कर सकते हैं. इसके अलावा पेटीएम, मोबीक्व‍िक जैसे मोबाइल वॉलेट भी कई ऑफर्स चलाते रहते हैं.

ये प्लैटफॉर्म आपको स्पेशल ड‍िस्काउंट देते हैं. इसके लिए आपको सिर्फ इतना करना होता है कि आप इनके प्लैटफॉर्म के जरिये भुगतान करें.

बता दें कि उत्तराखंड में हर साल 40 करोड़ लीटर पेट्रोल और 90 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती है. ईंधन की कीमत कम होने का सीधा फायदा यह भी होगा कि यातायात व परिवहन से जुड़ी कई सेवाएं सस्ती होंगी.

अब Whatsapp पर ही मिल जाएगी ट्रेन की हर जानकारी, जानें कैसे?

ट्रेन से सफर करने के दौरान आपको कई बातों का ध्यान रखना होता है. ट्रेन कितने बजे की है. कितने बजे निकलेगी और टाइम बदलने से जुड़ी हर जानकारी भी आपको रखनी होती है.

इसके लिए पहले जहां आपको ऑनलाइन चेक करना पड़ता था या फिर रेलवे स्टेशन पर जाने की जरूरत होती थी, अब यह झंझट खत्म हो गया है.

अब आप जिस ट्रेन से सफर कर रहे हैं, उसकी सारी जानकारी आपको व्हाट्सऐप नंबर पर मिल जाएगी. इसके लिए आपको सिर्फ एक छोटा सा काम करना है.

दरअसल भारतीय रेलवे ने मेक माय ट्रिप के साथ मिलकर एक नई सुविधा शुरू की है. इस सुविधा के तहत एक व्हाट्सऐप नंबर जारी किया गया है.

आपको अपने ट्रेन का नंबर इस मोबाइल नंबर पर भेजना है और आपको महज कुछ सेकंडों के भीतर ट्रेन की जानकारी हासिल हो जाएगी.

आप जिस ट्रेन से सफर करने वाले हैं, आपको उसका नंबर मोबाइल नंबर 7349389104 पर अपने व्हाट्सेएप से भेजना होगा.

इसके लिए सबसे पहले इस नंबर को अपने मोबाइल में सेव कर लीजिए. जैसे ही यह काम हो गया, उसके बाद आप जब चाहें, तब जानकारी हासिल कर सकते हैं.

आपके मैसेज भेजने के कुछ ही सेकंडों के बाद आपको आपकी ट्रेन से जुड़ी हर जानकारी मिल जाएगी. बता दें कि भारतीय रेलवे लगातार रेल से सफर को आसान बनाने में जुटा हुआ है. इसके लिए वह लगातार ऐसी नई-नई सुविधाएं लाता रहता है.

उत्तराखंड बोर्ड: 26 मई को आएंगे 10वीं और 12वीं के नतीजे

बेसब्री से अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे 10वीं और 12वीं के कक्षा के छात्रों का इंतजार 26 मई को खत्म हो जाएगा. इस दिन उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड का हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के नतीजे 26 मई को सुबह 11 बजे घोष‍ित किए जाएंगे.

बता दें कि इस साल हाईस्कूल में 1.46 लाख लोगों ने परीक्षा दी है. वहीं, इंटरमीडिएट में 130094 छात्रों ने दी है. पिछले साल की तुलना में इस बार 5 दिन पहले रिजल्ट घोषित किया जा रहा है.

शनिवार को बताया कि हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के नतीजे 26 मई को http://www.ubse.uk.gov.in पर जारी करेंगे. इस दिन सभापति आरके कुंवर जारी करेंगे.

एक अप्रैल से 30 मूल्यांकन केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाएं जांचने का काम 15 अप्रैल तक चला था. इस काम में 6 हजार से भी ज्यादा श‍िक्षकों को लगाया गया था. पिछले साल 31 मई को परीक्षा परिणाम जारी किए गए थे.

पलायन रोकने के लिए हो रही इस कोश‍िश की तारीफ होनी चाहिए…

उत्तराखंड में पलायन की समस्या पर हाल ही में पलायन आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है. इस रिपोर्ट पर हो रही चौतरफा चर्चा के बीच एक अच्छी कोश‍िश भी हुई है.

कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने सरकार की ‘होम स्टे’ योजना से राज्य में पलायन रोकने की अनोखी कोश‍िश की है. केएमवीएन ने पिथौरागढ़ जिले में यह योजना शुरू की है.

होम स्टे योजना के तहत 75 घरों को विकसित किया गया है. ये घर यहां अलग-अलग गांव में विकसित किए गए हैं. निगम ने न सिर्फ इन घरों का पुनर्निर्माण किया है, बल्क‍ि यहां आने वाले पर्यटकों के लिए रजाई-गद्दे और बेड देने का इंतजाम भी किया है.

इस योजना के बूते न सिर्फ यहां के लोग कमाई कर पा रहे हैं, बल्क‍ि हिमालयी क्षेत्र से सटे इन गांवों में रोजगार के मौके भी पैदा हो रहे हैं. केएमवीएन इस योजना के तहत 500 से ज्यादा घरों को विकसित करने की तैयारी कर रहा है. इनमें से 87 घरों का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया है.

यही नहीं, केएमवीएन इस योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए लोगों को प्रश‍िक्षण भी देगा. इस योजना के तहत पर्यटक चीन-तिब्बत सीमा से लगे दारमा और ब्यास घाटियों में जा पाएंगे.

यहां वे न सिर्फ ग्रामीण जनजीवन का नजदीकी से अनुभव कर पाएंगे, बल्क‍ि यहां की खूबसूरती का आनंद भी ले पाएंगे.

बता दें कि पिछले महीने ही पलायन आयोन ने राज्य में पलायन को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपी है. इसमें राज्य में पलायन को लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. यहां क्ल‍िक करें पढ़े पूरी रिपोर्ट.

वीडियो में देखें किस तरह उत्तराखंड को खोखला कर रहा है पलायन