कमली 2 हो रही तैयार, जानें-क्या दिखेगा इस बार?

‘कमली’ को उत्तराखंड की सबसे कामयाब फिल्मों में गिना जाता है। यही वजह है कि लोग लंबे समय से इसके दूसरे पार्ट की मांग कर रहे थे। आखिरकार हिमालयन फिल्म्स ने इसकी औपचारिक घोषणा कर दी है।

हिमालयन फिल्म्स ने यूट्यूब पर एक कम्युनिटी पोस्ट डालकर फिल्म को लेकर कुछ जानकारी दी है। यहां हम आपको न सिर्फ वो जानकारी देंगे बल्कि बताएंगे अंदर की कुछ बातें। जैसे इस बार फिल्म की स्टोरी क्या होगी? और कौन-से वो कलाकार हैं जो शायद आपको कमली पार्ट 2 में नजर नहीं आएंगे।

कमली पार्ट 2 का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हमारे चैनल पर भी हमने दो वीडियोज इस फिल्म को लेकर बनाए और कमेंट्स में अधिकतर लोगों ने कमली पार्ट टू के बारे में ही पूछा है। तो अच्छी खबर ये है कि कमली पार्ट 2 जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

हिमालयन फिल्म्स ने एक कम्युनिटी पोस्ट डालकर बताया कि कमली फिल्म की शूटिंग शुरू है। पोस्ट में देरी का कारण भी बताया गया। पोस्ट के मुताबिक कमली की 10वीं, 12वीं और मेडिकल की पढ़ाई को दिखाने की वजह से शूटिंग में काफी टाइम लग गया। खैर आप उम्मीद कर सकते हैं कि अगले साल मार्च या अप्रैल से पहले ये फिल्म सिनेमाघरों में हो सकती है। क्योंकि फिल्म की शूटिंग काफी वक्त से चल रही है।

इस बार क्या है स्टोरी?
पहले पार्ट में आपने देखा कि कमली डॉक्टर बनने का सपना पाले आगे बढ़ रही है। पार्ट 2 में आपको कमली का ये सपना पूरा होता दिखेगा। फिल्म का प्लॉट इसी के आसपास घूमता है। पार्ट 2 में आप कमली की 10वीं, 12वीं और मेडिकल पढ़ाई देखेंगे। और इस पढ़ाई को करने के लिए उसे किन आर्थिक और सामाजिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, वो इस फिल्म का अहम हिस्सा होगा।

कौन-कौन कलाकार दिखेंगे?
पार्ट 2 में आपको कमली की भूमिका में प्राची पंवार नजर आएंगी। जिन्होंने पहले भाग में भी कमली का किरदार निभाया था। प्राची के साथ ही सवाली मैडम भी आपको नजर आएंगी। सवाली मैडम का किरदार इस बार भी तुलिका चौहान ही निभाती नजर आएंगी। फिल्म का निर्देशन अनुज जोशी और गीत प्राची पंवार के पिता जितेंद्र पंवार के ही लिखे होंगे।

अब बात करते हैं उन दो कलाकारों की जो शायद आपको इस बार फिल्म में नजर नहीं आएंगे। हम बात कर रहे हैं जीतू और शिब्बू की। जीतू यानि अभिषेक जग्गी अभी पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, शिब्बू यानि सचिन पंवार थाइलैंड में होटल में नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में पूरी संभावना है कि पार्ट 2 में आपको जीतू और शिब्बू की जोड़ी नजर नहीं आए।

हालांकि संभावना ये भी है कि जीतू और शिब्बू का रोल इसबार कोई और कलाकार निभाएं। क्योंकि फिल्म निर्माता नहीं चाहेंगे कि इतने फेमस कैरेक्टर्स को खत्म किया जाए।

तो दोस्तों ये थी कुछ जानकारी और कयास। फिलहाल हम फिल्म का इंतजार करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जैसे पार्ट वन ने सबके दिल में जगह बनाई, वैसे ही पार्ट 2 भी सबसे दिल में जगह बनाए।

आप उत्तराखंड के हैं, क्या ये 5 चीजें पता हैं आपको?

गुजरते वक्त के साथ पुरानी चीजें छूटती चली जाती हैं और नई चीजें अपनी जगह बना लेती हैं। आज हम आपको 5 ऐसी चीजों के बारे में बताने वाले हैं जो न सिर्फ पहाड़ की परंपराओं का अभिन्ना हिस्सा रही हैं बल्कि इन चीजों की बदौलत पहाड़ की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा का जीवन चलता था। ये 5 चीजें जो अब पहाड़ में बहुत ही कम सुनाई या दिखाई पड़ती हैं। और नई पीढ़ी को शायद इनके बारे में पता भी नहीं है।

1. ढाकर

ढाकर पैटी रे माडू थैर्वाअ
अस्सी बरस कु बुढया रे माडू थैर्वाअ

पहाड़ का जीवन हमेशा से संघर्षों से भरा रहा है। उसी की बानगी है ढाकर। पुराने वक्त में लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर ढाकर जाते थे और जरूरत की चीजें लाया करते थे। इस दौरान कोटद्वार समेत कई जगहों पर ढाकर मंडिया लगा करती थीं। जहां लोग अपने खेतों और सग्वाड़ों पर उगी मिर्च या दूसरे धान लाया करते थे। मंडियों में इन चीजों के बदले नमक, सब्जियां और जरूरत की दूसरी चीजें ले जाया करते थे।

ढाकर यानि ढोकर ले जाना। जो ढाकर आते थे, उन्हें ढाकरी कहा जाता था। आज लुप्त हो चुकी इस परंपरा से सैकड़ों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई थी। जब लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर ढाकर जाते थे तो रास्ते में कई ढाकरी पड़ाव होते थे। बांघाट और दुग्गड्डा भी कभी ढाकरी पड़ाव थे।

जहां-जहां ढाकरी रुकते तो वहां मनोरंजन का पूरा साधन होता। नाच-गाना करने वाले, जादू खेल दिखाने वाले, मैणा यानि कहावतें, लोकगीतों को गाना जैसे कई तरीके वक्त काटने के लिए अपनाए जाते थे। बदले में मनोरंजन करने वालों को दिया जाता था- इनामी राशि। और इसी से होता था इनका जीवनयापन। ढाकर की परंपरा पर आधे पहाड़ की आजीविका जुड़ी हुई थी।

2. डड्वार
ये एक ऐसी चीज है जो थोड़ी बहुत आज भी बची हुई है। डड्वार पहाड़ में दिया जाने वाला एक प्रकार का पारितोषिक है। ये फसल का एक हिस्सा होता है। बदलते वक्त के साथ फसल के बदले कई जगहों पर पैसे भी दिए जाते हैं। इसे ब्राह्मण, लोहार और औजी को दिया जाता था। सालभर में होने वाली दो फसलों गेंहू-जौ और दूसरी धान के वक्त डड्वार दिया जाता था।

फसल पकने के बाद पहला हिस्सा देवता को चढ़ाया जाता है, इसे पूज या न्यूज कहा जाता है। दूसरा हिस्सा पंडित को दिया जाता था। सालभर पंडित ने घर में जो पूजा-पाठ किए और उसमें कभी कम दक्षिणा गई हो तो ये डड्वार एक तरह से उस कमी को पूरा करने के लिए दिया जाता था।

तीसरा हिस्सा लोहार का था। फसल काटने से पहले दाथुड़ी और अन्य हथियारों को पैना करने के बदले डड्वार दिया जाता था। वहीं, संग्राद- मक्रैणी और अन्य अहम त्योहारों पर घर आकर ढोल-दमो बजाने वाले औजियों को भी डड्वार दिया जाता था। औजियों को ही डड्वार देने की परंपरा कई जगहों पर आज भी है।

3. बोरू
बोरू डड्वार की तरह ही श्रम के बदले पारितोषिक देने की परंपरा है। जहां पंडित, औजी, लोहार को डड्वार दिया जाता है। वहीं, खेतों में काम करने और किसी अन्य के काम में हाथ बटाने आए ग्रामीणों को बोरु दिया जाता था। यह एक तरह की दैनिक मजदूरी होती थी जो काम करने वाले व्यक्ति को दी जाती थी। हालांकि बदलते वक्त के साथ बौरु की जगह दिहाड़ी ने ले ली है।

4. धिनाली
आज भले ही हालात बदल रहे है। पहाड़ के लोग भैंस, गाय रखने से परहेज कर रहे हैं। लेकिन एक वक्त था, जब ये सब शान माने जाते थे। जब किसी दुधारु पशु का दूध निकालकर लाया जाता है तो उसे हमेशा छुपाकर लाया जाता है. स्थानीय भाषा में दूध, दही, घी आदि को धिनाली कहा जाता है. धिनाली को छुपाने की एक वजह ये भी थी कि किसी की नजर ना लगे और गाय या भैंस कम दूध ना देने लगे। एक वक्त ऐसा भी था, जब धिनाली को परिवार की संपन्नता का प्रतीक माना जाता था। बिना दूध की चाय पीना, एक गाली मानी जाती थी।

5. कोटी बनाल
कोटी बनाल कोई परंपरा तो नहीं है लेकिन यह वो शैली है, जिससे उत्तराखंड के घर हजारों सालों तक सीना तने खड़े रहते हैं। सीमेंट और शहरीकरण की हवा लगने के बाद कोटी बनाल वास्तुकला खत्म सी हो गई है। लेकिन इसके अवशेष आज भी उत्तरकाशी, जौनसार और हिमाचल में देखने को मिलती है। कोटी बनाल से बनाए गए मकान भूकंप रोधी होते थे। और इसमें कई मंजिलों के घर बनाए जाते थे। शहरीकरण की हवा लगने के बाद कोटी-बनाल वास्तुकला खोती जा रही है और हम कॉन्क्रीट जंगल अपने पहाड़ में खड़ा करने लग गए हैं।

बिग बॉस की 3 पहाड़ियों से मिले आप?

आजकल टीवी स्क्रीन पर फिर बिग बॉस की आवाज गूंज रही है। हर साल की तरह इस बार भी घर में ड्रामा, एक्शन और माइंड गेम खेले जा रहे हैं। हम आज इन सबके बारे में बात नहीं करने वाले हैं। हम आपको मिलाने वाले हैं बिग बॉस के दो पहाड़ियों से। और एक ऐसे कंटेस्टेंट से जो पहाड़ का तो नहीं है लेकिन पहाड़ से एक कनेक्शन जरूर रखता है।

नैना सिंह

नैना सिंह उत्तराखंड की रहने वाली हैं


नैना सिंह

बहुत कम ही लोगों को पता है कि नैना सिंह उत्तराखंड की रहने वाली हैं। स्पिल्ट्सविला की विनर रह चुकीं नैना गढ़वाल मंडल से आती हैं।हालांकि कई सालों से नैना और उनका परिवार मुरादाबाद में रहता है। नैना अभी मुंबई में रहती हैं। उन्होंने कुमकुम भाग्य समेत कई टीवी प्रोग्राम में काम किया है। बिग बॉस में उनकी वाइल्ड कार्ड एंट्री हुई थी। हालांकि अब वो घर से बाहर हो चुकी हैं

पति अभिनव शुक्ला के साथ रुबिना दिलैक

पति अभिनव शुक्ला के साथ रुबिना दिलैक

रुबिना दिलेक
दूसरी हैं रुबिना दिलैक। हिमाचल के पहाड़ों से वास्ता रखने वाली रुबिना टीवी की काफी फेमस एक्ट्रेस हैं। उन्हें टीवी की छोटी बहू भी कहा जाता है। रुबीना ‘मिस शिमला’ और ‘मिस नॉर्थ इंडिया पेजेंट’ समेत कई सौंदर्य प्रतियोगिताएं जीत चुकी हैं। बिग बॉस में रुबिना अपने पति अभिनव शुक्ला के साथ शामिल हुई हैं।

कविता कौशिक

कविता कौशिक

कविता कौशिक
तीसरा नाम है कविता कोशिक का। हालांकि कविता कौशिक का पहाड़ से सीधा नाता नहीं है लेकिन उन्हें पहाड़ से प्रेम जरूर है। मूल रूप से राजस्थान की कविता कौशिक की पढ़ाई नैनीताल के एक बोर्डिंग स्कूल में हुई है। उनके परिवार के कई सदस्य देहरादून में रहते हैं। सिर्फ यही नहीं, कविता ने ठंडी के मौसम में त्रियुगीनारायण में अपनी शादी रचाई थी। बिग बॉस में कविता कौशिक की जो छवि अभी तक बनकर बाहर निकली है वो निगेटिव ज्यादा नजर आ रही है।