राजेंद्र की गलती ये है कि वो पाकिस्तान के कब्जे में नहीं!

7 जनवरी का दिन था। सेना में हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी पैट्रोलिंग के दौरान गुलमर्ग में लापता हो गए। 8 जनवरी की सुबह होतेहोते यह खबर हर तरफ न्यूज चैनलों और टीवी पर थी कि भारतीय सेना का एक जवान लापता हो गया है। कुछ ने ये भी कहा कि राजेंद्र फिसलकर पाकिस्तान की सीमा में जा पहुंचा है। जैसे ही खबर आई। वैसे ही राजेंद्र के देहरादून स्थित घर में आम से खास लोगों का तांता लग गया।

8 जनवरी का दिन था और आज फरवरी चुका है, लेकिन राजेंद्र का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। राजेंद्र के घर पर भी अब खास यानि नेताओं ने आना बंद कर दिया है। जानते हैं क्यों? क्योंकि अब मीडिया के कैमरे और अखबारों के रिपोर्टरों को राजेंद्र नेगी में कोई रुचि नहीं रह गई है।

राजेंद्र लापता हुआ है, ये उसके परिवार के लिए चिंता है। मीडिया ने हर मुद्दे की तरह इस मुद्दे को भी छोड़ दिया। उत्तराखंड के लोगों ने सरकार से कहा कि जिस तरह उसने झटपट तरीके से विंग कमांडर अभिनंदन को वापस लाया, उसी तरह राजेंद्र को भी लाया जाए। लेकिन सरकार के कानों में जूएं रेंगती नहीं दिख रहीं।

खैर, अभिनंदन टीवी चैनलों के लिए TRP था तो दो दिन तक लगातार हर तरफ अभिनंदन चलता रहा। राजेंद्र नेगी लापता हुआ है। तो क्या हुआ वो देश का सैनिक है। तो क्या हुआ कि वो देश की सेवा करतेकरते लापता हुआ है। टीवी चैनलों को अपनी TRP से मतलब है। राजेंद्र की खबर चलाने से वो नहीं रही तो उसे दिखाएंगे भी नहीं।

उम्मीदों में बंधी हैं आंखें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही सैनिकों के नाम पर जितना वोट बटोर लें, लेकिन जब एक सैनिक को खोजने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की बात आती है तो वो कम ही नजर रही है। उस पर मीडिया भी TRP के चक्कर में सरकार से सवाल भी नहीं पूछ रहा। और दूसरी तरफ, राजेंद्र के घरवाले अाज भी फोन की घंटी बजने का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीदें लगाए बैठे हैं। शायद खबर आएगी और सबके चेहरे पर खुशी छा जाएगी।

अभी तक क्या हुआ?

राजेंद्र नेगी के लापता होने के बाद कुछ औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। पहली, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने राजेंद्र को वापस लाने के लिए खोज अभियान तेज करने की अपील की। मुख्यमंत्री जी भी राजनाथ जी को बोलकर चुपचाप सो गए हैं।

खैर, दूसरा अपडेट सेना की तरफ से आया। 13 जनवरी के दिन सेना ने कहा कि 11वीं गढ़वाल राइफल के हवलदार राजेन्द्र सिंह नेगी पाकिस्तान के कब्जे में नहीं है। सेना ने कहा कि 7 जनवरी को जिस स्थान पर यह हादसा पेश आया है, वहां से फिसलकर पाकिस्तान की तरफ जाने की संभावना नहीं है। 

13 जनवरी वो ही तारीख है, जिस दिन तक सभी न्यूज चैनल और न्यूज पोर्टल ताने पड़े थे कि राजेंद्र पाकिस्तान में फंस गए हैं। कइयों ने ये भी कहा कि वह पाकिस्तान के कब्जे में हैं। जब तक पाकिस्तान था, सबने खूब जोरोंशोरों से राजेंद्र के बारे में खबरें लिखीं। ज्यों ही सेना ने साफ किया कि राजेंद्र पाकिस्तान में नहीं हैं तो मीडिया को तो सिर्फ पाकिस्तान में इंटरेस्ट था। उसने राजेंद्र पर खबरें लिखना और बताना बंद कर दिया। क्योंकि अब TRP यानि पाकिस्तान का नाम हट चुका था।

तीसरा अपडेट यह है कि सेना की तरफ से राजेंद्र नेगी की खोजबीन जारी है। हालांकि इसमें सरकार की तरफ से कोई जल्दबाजी या फिर चिंता कहीं नजर नहीँ आती। दूसरी तरफ, अभिनंदन के लिए दिनरात एक करने वाला इंडियन मीडिया राजेंद्र के लिए एक छोटी सी खबर भी नहीं चला पा रहा है।

और हमारे नेता, ये जब वोट मांगने आएंगे तो सेना के जवानों का गुणगान करेंगे। लेकिन जब उन्हें बचाने और उनके लिए कुछ करने की बारी आती है तो ये फिर आंखकान बंद कर सो जाते हैं।

हम उम्मीद करते हैं कि राजेंद्र नेगी जल्द से जल्द मिल जाएं। हम ये समझते हैं कि राजेंद्र को खोजने में कई दिक्कतें पेश रही होंगी। लेकिन उनके लापता होने पर मीडिया और सरकार की चुप्पी काफी निराशाजनक है।

काश राजेंद्र पाकिस्तान के कब्जे में चला जाता। कम से कम तब तो सरकार उसे वापस लाने के लिए प्रयास करती। क्योंकि तब मोदी जी वाहवाही लूट पाते। लेकिन ये भी राजेंद्र की गलती है कि वो पाकिस्तान के कब्जे में नहीं है। क्योंकि होता तो वो दूसरा अभिनंदन होता। और मोदी जी से लेकर मीडिया तक उसका अभिनंदन करती। पर क्या करें? वो अभिनंदन नहीं है ना!

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